श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 681
 
 
श्लोक  3.5.681 
শুনি’ অতি অকৈতব দ্বিজের বচন
তুষ্ট হৈলেন প্রভু, সর্ব ভক্ত-গণ
शुनि’ अति अकैतव द्विजेर वचन
तुष्ट हैलेन प्रभु, सर्व भक्त-गण
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण के निष्कपट वचन सुनकर भगवान् और भक्तगण प्रसन्न हो गये।
 
Hearing the sincere words of the Brahmin, God and his devotees became happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)