श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 676
 
 
श्लोक  3.5.676 
যাঙ্হার স্মরণে খণ্ডে অবিদ্যা-বন্ধন
অনাযাসে চলি’ যায বৈকুণ্ঠ ভুবন”
याङ्हार स्मरणे खण्डे अविद्या-बन्धन
अनायासे चलि’ याय वैकुण्ठ भुवन”
 
 
अनुवाद
“आपका स्मरण करने से मनुष्य अज्ञान के सभी बंधनों से मुक्त हो जाता है और आसानी से वैकुण्ठ धाम प्राप्त कर लेता है।”
 
“By remembering You, one becomes free from all the bonds of ignorance and easily attains Vaikuntha Dham.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)