श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  3.5.64 
সুখে শ্রীনিবাস, তুমি বসি’ থাক ঘরে
আপনি আসিবে সব তোমার দুযারে
सुखे श्रीनिवास, तुमि वसि’ थाक घरे
आपनि आसिबे सब तोमार दुयारे
 
 
अनुवाद
हे श्रीनिवास, तुम घर पर सुख से बैठो। सब कुछ तुम्हारे द्वार पर आ जाएगा।
 
O Srinivasa, sit comfortably at home. Everything will come to your doorstep.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)