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श्लोक 3.5.637  |
নিত্যানন্দ-স্বরূপের শরণ-প্রভাবে
ঝড-বৃষ্টি আর কার দেহে নাহি লাগে |
नित्यानन्द-स्वरूपेर शरण-प्रभावे
झड-वृष्टि आर कार देहे नाहि लागे |
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| अनुवाद |
| नित्यानन्द स्वरूप की शरणागति के प्रभाव से वे तूफानी वर्षा से उत्पन्न कष्ट से मुक्त हो गये। |
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| By surrendering to the form of Nityananda, he was relieved of the suffering caused by the torrential rain. |
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