vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
»
श्लोक 531
श्लोक
3.5.531
নিত্যানন্দ-স্বরূপের দেখি’ অলঙ্কার
সুবর্ণ প্রবাল-মণি মুক্তা দিব্য-হার
नित्यानन्द-स्वरूपेर देखि’ अलङ्कार
सुवर्ण प्रबाल-मणि मुक्ता दिव्य-हार
अनुवाद
एक बार उन्होंने देखा कि नित्यानंद स्वरूप को स्वर्ण, मूंगा, रत्नों और मोतियों से बने दिव्य हारों और आभूषणों से सजाया गया था।
Once he saw that Nityananda Swarupa was adorned with divine necklaces and ornaments made of gold, coral, gems and pearls.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd
Download Vedamrit Android App
Install
×