श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 514
 
 
श्लोक  3.5.514 
গোরোচনা-চন্দনে লেপিত সর্ব-অঙ্গ
নিরবধি বাল-গোপালের প্রায রঙ্গ
गोरोचना-चन्दने लेपित सर्व-अङ्ग
निरवधि बाल-गोपालेर प्राय रङ्ग
 
 
अनुवाद
उनका पूरा शरीर चंदन और गोरोचन से लिपटा रहता था। वे हमेशा ग्वालबालों की तरह खेलते रहते थे।
 
His entire body was smeared with sandalwood and saffron. He always played like a cowherd boy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)