श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 50-51
 
 
श्लोक  3.5.50-51 
শ্রীবাস বলেন,—“এই দঢান আমার
তিন উপবাসে যদি না মিলে আহার
তবে সত্য কহোঙ্ঘট বান্ধিযা গলায
প্রবেশ করিমু মুঞি সর্বথা গঙ্গায”
श्रीवास बलेन,—“एइ दढान आमार
तिन उपवासे यदि ना मिले आहार
तबे सत्य कहोङ्घट बान्धिया गलाय
प्रवेश करिमु मुञि सर्वथा गङ्गाय”
 
 
अनुवाद
श्रीवास ने उत्तर दिया, "यह मेरा दृढ़ विश्वास है। यदि मुझे तीन दिन तक भोजन न मिले, तो मैं आपसे सत्य कहता हूँ कि मैं अपने गले में घड़ा बाँधकर गंगा में डूब मरूँगा।"
 
Srivasa replied, "This is my firm belief. If I do not get food for three days, I tell you the truth, I will tie a pot around my neck and drown myself in the Ganges."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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