श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 485
 
 
श्लोक  3.5.485 
যদি তুমি প্রকাশ না কর’ আপনারে
তবে কার শক্তি আছে জানিতে তোমারে?
यदि तुमि प्रकाश ना कर’ आपनारे
तबे कार शक्ति आछे जानिते तोमारे?
 
 
अनुवाद
“यदि आप स्वयं को प्रकट नहीं करेंगे, तो आपको जानने की शक्ति किसमें होगी?
 
“If you do not reveal yourself, who will have the power to know you?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)