श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 483-484
 
 
श्लोक  3.5.483-484 
পতিত-পাবন তুমি দোষ-দৃষ্টি-শূন্য
তোমারে সে জানে যার আছে বহু পুণ্য
সর্ব-যজ্ঞ-ময এই বিগ্রহ তোমার
অবিদ্যা-বন্ধন খণ্ডে স্মরণে যাঙ্হার
पतित-पावन तुमि दोष-दृष्टि-शून्य
तोमारे से जाने यार आछे बहु पुण्य
सर्व-यज्ञ-मय एइ विग्रह तोमार
अविद्या-बन्धन खण्डे स्मरणे याङ्हार
 
 
अनुवाद
"आप पतित आत्माओं के उद्धारक हैं। आप दूसरों में दोष नहीं ढूँढ़ते। केवल वही व्यक्ति आपको समझ सकता है जिसके अंदर अपार धर्मपरायणता हो। आप समस्त त्याग के साक्षात् स्वरूप हैं। आपके स्मरण मात्र से ही अज्ञान के सारे बंधन नष्ट हो जाते हैं।"
 
"You are the savior of fallen souls. You do not find fault with others. Only one who possesses immense devotion can understand you. You are the embodiment of all renunciation. By merely remembering you, all the bonds of ignorance are destroyed."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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