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श्लोक 3.5.469  |
তবে কত-দিনে আইলেন শান্তিপুরে
আচার্য-গোসাঞি প্রিয-বিগ্রহের ঘরে |
तबे कत-दिने आइलेन शान्तिपुरे
आचार्य-गोसाञि प्रिय-विग्रहेर घरे |
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| अनुवाद |
| फिर कुछ दिनों के बाद वे शांतिपुर में अपने प्रिय अद्वैत आचार्य के घर गए। |
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| Then after a few days he went to the house of his beloved Advaita Acharya in Shantipur. |
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