vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
»
श्लोक 465
श्लोक
3.5.465
অন্যের কি দায, বিষ্ণু-দ্রোহী যে যবন
তাহারা ও পাদ-পদ্মে লৈল শরণ
अन्येर कि दाय, विष्णु-द्रोही ये यवन
ताहारा ओ पाद-पद्मे लैल शरण
अनुवाद
अन्यों की तो बात ही क्या, यहाँ तक कि भगवान विष्णु के शत्रु यवन भी उनके चरणकमलों की शरण में आये।
Forget about others, even the Yavanas, enemies of Lord Vishnu, came to seek refuge at his lotus feet.
तात्पर्य
यावन स्वभाव से ही निंदक और परमात्मा से ईष्र्या करने वाले होते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×