श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.5.43 
প্রভু বলে,—“তবে তুমি করহ সন্ন্যাস”
“তাহা না পারিব মুঞি”বলেন শ্রীবাস
प्रभु बले,—“तबे तुमि करह सन्न्यास”
“ताहा ना पारिब मुञि”बलेन श्रीवास
 
 
अनुवाद
तब भगवान ने कहा, “तो फिर तुम्हें संन्यास ले लेना चाहिए,” और श्रीवास ने उत्तर दिया, “मैं ऐसा नहीं कर सकता।”
 
Then the Lord said, “Then you should take sannyasa,” and Srivasa replied, “I cannot do that.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)