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श्लोक 3.5.406  |
যদ্যপিহ কাজী মহা-হিṁসক-চরিত
তথাপি না বলে কিছু হৈলা স্তম্ভিত |
यद्यपिह काजी महा-हिꣳसक-चरित
तथापि ना बले किछु हैला स्तम्भित |
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| अनुवाद |
| यद्यपि काजी स्वभाव से बहुत ईर्ष्यालु था, फिर भी वह स्तब्ध था और कुछ भी नहीं कह सका। |
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| Although the Qazi was very jealous by nature, he was stunned and could not say anything. |
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