श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 379
 
 
श्लोक  3.5.379 
ভাগ্যবন্ত মাধবের হেন কন্ঠ-ধ্বনি
শুনিতে আবিষ্ট হয অবধূত-মণি
भाग्यवन्त माधवेर हेन कन्ठ-ध्वनि
शुनिते आविष्ट हय अवधूत-मणि
 
 
अनुवाद
भाग्यशाली माधव की वाणी इतनी मधुर थी कि अवधूतों का शिरोमणि परमानंद में लीन हो गया।
 
The words of fortunate Madhava were so sweet that the chief of the Avadhoots became immersed in ecstasy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)