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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 373
श्लोक
3.5.373
মস্তকে করিযা গঙ্গা-জলের কলস
নিরবধি ডাকে,—“কে কিনিবে গো-রস?”
मस्तके करिया गङ्गा-जलेर कलस
निरवधि डाके,—“के किनिबे गो-रस?”
अनुवाद
वह अपने सिर पर गंगाजल का एक बर्तन रखे हुए लगातार पुकार रहा था, “कौन दूध खरीदना चाहता है?”
He was carrying a pot of Ganga water on his head and continuously calling out, “Who wants to buy milk?”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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