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श्लोक 3.5.373  |
মস্তকে করিযা গঙ্গা-জলের কলস
নিরবধি ডাকে,—“কে কিনিবে গো-রস?” |
मस्तके करिया गङ्गा-जलेर कलस
निरवधि डाके,—“के किनिबे गो-रस?” |
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| अनुवाद |
| वह अपने सिर पर गंगाजल का एक बर्तन रखे हुए लगातार पुकार रहा था, “कौन दूध खरीदना चाहता है?” |
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| He was carrying a pot of Ganga water on his head and continuously calling out, “Who wants to buy milk?” |
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