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श्लोक 3.5.366  |
এই-মত নিত্যানন্দ—বালক-জীবন
বিহ্বল করিতে লাগিলেন শিশু-গণ |
एइ-मत नित्यानन्द—बालक-जीवन
विह्वल करिते लागिलेन शिशु-गण |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार नित्यानंद, जो सभी बालकों के प्राण और आत्मा हैं, उन बालकों को परमानंदमय प्रेम से अभिभूत कर देते थे। |
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| Thus Nityananda, who is the life and soul of all children, overwhelmed them with ecstatic love. |
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