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श्लोक 3.5.349  |
যে-দিকে চাহেন দুই-কমল-নযনে
সেই-দিকে প্রেম-বর্ষে, ভাসে সর্ব-জনে |
ये-दिके चाहेन दुइ-कमल-नयने
सेइ-दिके प्रेम-वर्षे, भासे सर्व-जने |
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| अनुवाद |
| जिस ओर भी उनके कमल-नेत्र दृष्टिपात करते, वहाँ आनंदमय प्रेम की वर्षा होती और सभी लोग उसमें डूब जाते। |
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| Wherever His lotus eyes looked, there would be a shower of blissful love and everyone would be immersed in it. |
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