श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 337
 
 
श्लोक  3.5.337 
কত বা নির্মিত কত করিযা নির্মাণ
পরিলেন অলঙ্কার—যেন ইচ্ছা তান
कत वा निर्मित कत करिया निर्माण
परिलेन अलङ्कार—येन इच्छा तान
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने अपने आप को पहले से बने आभूषणों से तथा अपनी इच्छानुसार बने आभूषणों से सजाया।
 
Then they adorned themselves with pre-made ornaments and ornaments made as per their wish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)