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श्लोक 3.5.332  |
এই-মত পরানন্দ প্রেম-সুখ-রসে
ক্ষণ হেন কেহ না জানিল তিন মাসে |
एइ-मत परानन्द प्रेम-सुख-रसे
क्षण हेन केह ना जानिल तिन मासे |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार वे सभी प्रेम के आनंद में इतने मग्न हो गए कि वे तीन महीने उन्हें एक क्षण के समान प्रतीत होने लगे। |
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| Thus they all became so absorbed in the bliss of love that those three months seemed like a moment to them. |
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