vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
»
श्लोक 313
श्लोक
3.5.313
যে-দিকে দেখেন নিত্যানন্দ মহাশয
সেই দিকে মহা-প্রেম-ভক্তি-বৃষ্টি হয
ये-दिके देखेन नित्यानन्द महाशय
सेइ दिके महा-प्रेम-भक्ति-वृष्टि हय
अनुवाद
भगवान नित्यानन्द जिस ओर भी दृष्टि डालते, वहाँ परमानंद भक्ति प्रेम की तीव्र वर्षा हो जाती।
Wherever Lord Nityananda looked, there was an intense shower of ecstatic devotion and love.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×