श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 313
 
 
श्लोक  3.5.313 
যে-দিকে দেখেন নিত্যানন্দ মহাশয
সেই দিকে মহা-প্রেম-ভক্তি-বৃষ্টি হয
ये-दिके देखेन नित्यानन्द महाशय
सेइ दिके महा-प्रेम-भक्ति-वृष्टि हय
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानन्द जिस ओर भी दृष्टि डालते, वहाँ परमानंद भक्ति प्रेम की तीव्र वर्षा हो जाती।
 
Wherever Lord Nityananda looked, there was an intense shower of ecstatic devotion and love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)