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श्लोक 3.5.309  |
হেন সে দেহেতে জন্মিযাছে প্রেম-বল
তৃণ-প্রায উপাডিযা ফেলায সকল |
हेन से देहेते जन्मियाछे प्रेम-बल
तृण-प्राय उपाडिया फेलाय सकल |
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| अनुवाद |
| उसका शरीर इतने शक्तिशाली परमानंद प्रेम से भर गया कि उसने उन पेड़ों को ऐसे उखाड़ दिया मानो वे घास के पत्ते हों। |
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| His body was filled with such powerful ecstatic love that he uprooted those trees as if they were blades of grass. |
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