श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 306
 
 
श्लोक  3.5.306 
কেহ কেহ প্রেম-সুখে হুঙ্কার করিযা
বৃক্ষের উপরে থাকি’ পডে লম্ফ দিযা
केह केह प्रेम-सुखे हुङ्कार करिया
वृक्षेर उपरे थाकि’ पडे लम्फ दिया
 
 
अनुवाद
किसी ने प्रेम के आवेश में जोर से दहाड़ लगाई और पेड़ की चोटी से नीचे कूद गया।
 
Someone roared loudly in the passion of love and jumped down from the top of the tree.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)