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श्लोक 3.5.300  |
এত কহি’ ’হরি’ বলি’ করযে হুঙ্কার
সর্বা-দিকে প্রেম-দৃষ্টি করিলা বিস্তার |
एत कहि’ ’हरि’ बलि’ करये हुङ्कार
सर्वा-दिके प्रेम-दृष्टि करिला विस्तार |
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| अनुवाद |
| यह कहकर नित्यानंद ने उच्च स्वर में हरि नाम का जप किया और फिर अपनी प्रेम भरी दृष्टि सभी दिशाओं में डाली। |
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| Saying this, Nityananda chanted the name Hari loudly and then cast his loving gaze in all directions. |
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