श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 296
 
 
श्लोक  3.5.296 
সেই শ্রী-অঙ্গের দিব্য-দমনক-গন্ধে
চতুর্-দিকে পূর্ণ হৈ’ আছযে আনন্দে
सेइ श्री-अङ्गेर दिव्य-दमनक-गन्धे
चतुर्-दिके पूर्ण है’ आछये आनन्दे
 
 
अनुवाद
“उनके शरीर को सुशोभित करने वाले दमनक पुष्पों की दिव्य सुगंध से चारों दिशाएँ भर गयीं।
 
“The four directions were filled with the divine fragrance of the Damanaka flowers that adorned his body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)