श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 289
 
 
श्लोक  3.5.289 
দমনক-পুশ্পের সুগন্ধে মন হরে
দশ-দিক্ ব্যাপ্ত হৈল সকল মন্দিরে
दमनक-पुश्पेर सुगन्धे मन हरे
दश-दिक् व्याप्त हैल सकल मन्दिरे
 
 
अनुवाद
दमनक के फूलों की सुगंध ने सभी का मन मोह लिया। दसों दिशाएँ उस सुगंध से भर गईं।
 
The fragrance of the Damanaka flowers captivated everyone, filling all directions with its scent.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)