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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 283
श्लोक
3.5.283
কি অপূর্ব বর্ণ সে বা কি অপূর্ব গন্ধ
সে পুষ্প দেখিলে ক্ষয যায সর্ব-বন্ধ
कि अपूर्व वर्ण से वा कि अपूर्व गन्ध
से पुष्प देखिले क्षय याय सर्व-बन्ध
अनुवाद
उन फूलों का रंग और सुगंध कितनी अद्भुत थी! उन फूलों को देखकर ही सारे भव-बंधन नष्ट हो गए।
The color and fragrance of those flowers were so wonderful! Just looking at them destroyed all worldly attachments.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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