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श्लोक 3.5.257  |
সুকৃতি মাধব-ঘোষ—কীর্তনে তত্পর
হেন কীর্তনীযা নাহি পৃথিবী-ভিতর |
सुकृति माधव-घोष—कीर्तने तत्पर
हेन कीर्तनीया नाहि पृथिवी-भितर |
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| अनुवाद |
| परम पावन माधव घोष कीर्तन में निपुण थे। उनके समान कीर्तन गुरु सम्पूर्ण विश्व में कोई नहीं था। |
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| His Holiness Madhav Ghosh was a master of kirtan. There was no other kirtan master like him in the entire world. |
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