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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 241
श्लोक
3.5.241
পুরন্দর-পণ্ডিত গাছেতে গিযা চডে
’মুঞিরে অঙ্গদ’ বলি’ লম্ফ দিযা পডে
पुरन्दर-पण्डित गाछेते गिया चडे
’मुञिरे अङ्गद’ बलि’ लम्फ दिया पडे
अनुवाद
पुरंदर पंडित एक पेड़ पर चढ़ जाते और उससे कूदकर घोषणा करते, “मैं अंगद हूँ।”
Purandara Pandit would climb a tree and jump from it and declare, “I am Angada.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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