श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 238
 
 
श्लोक  3.5.238 
হৈলা রাধিকা-ভাব—গদাধর দাসে
’দধি কে কিনিবে?’ বলে অট্ট অট্ট হাসে
हैला राधिका-भाव—गदाधर दासे
’दधि के किनिबे?’ बले अट्ट अट्ट हासे
 
 
अनुवाद
गदाधरदास राधिका की भाव-भंगिमा में लीन हो गए। वे ज़ोर से हँसे और बोले, "दही कौन खरीदेगा?"
 
Gadadhara Dasa was absorbed in Radhika's expression. He laughed out loud and said, "Who will buy the yogurt?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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