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श्लोक 3.5.227  |
ভক্তি-রস-দাতা তুমি তুমি সম্বরিলে
তবে অবতার বা কি নিমিত্তে করিলে? |
भक्ति-रस-दाता तुमि तुमि सम्वरिले
तबे अवतार वा कि निमित्ते करिले? |
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| अनुवाद |
| "आप भक्ति रस के वितरक हैं। यदि आप उन्हें छिपाते हैं, तो इस संसार में आपके अवतार का क्या उपयोग है?" |
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| "You are the distributor of devotional essences. If you hide them, what is the use of your incarnation in this world?" |
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