श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.5.22 
বাসুদেব দত্ত দেখি’ শ্রী-গৌরসুন্দর
কোলে করি’ কান্দিতে লাগিলা বহুতর
वासुदेव दत्त देखि’ श्री-गौरसुन्दर
कोले करि’ कान्दिते लागिला बहुतर
 
 
अनुवाद
जब श्री गौरसुन्दर ने वासुदेव दत्त को देखा तो उन्होंने उन्हें गले लगा लिया और खूब रोये।
 
When Sri Gaurasundara saw Vasudeva Datta, he embraced him and wept profusely.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)