श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 219
 
 
श्लोक  3.5.219 
যেন রামচন্দ্রে লক্ষ্মণের রতি মতি
সেই মত নিতাযের শ্রী-চৈতন্যে প্রীতি
येन रामचन्द्रे लक्ष्मणेर रति मति
सेइ मत नितायेर श्री-चैतन्ये प्रीति
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य के प्रति निताई का प्रेम वैसा ही था जैसा लक्ष्मण का रामचन्द्र के प्रति था।
 
Nitai's love for Lord Chaitanya was like that of Lakshmana for Ramachandra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)