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श्लोक 3.5.214  |
এই মত প্রভু সর্ব ভৃত্য করি’ সঙ্গে
নিরবধি গোঙাযেন সঙ্কীর্তন-রঙ্গে |
एइ मत प्रभु सर्व भृत्य करि’ सङ्गे
निरवधि गोङायेन सङ्कीर्तन-रङ्गे |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार भगवान् तथा उनके सभी सेवक निरन्तर संकीर्तन लीला का आनन्द लेते रहे। |
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| In this way the Lord and all His servants continued to enjoy the Sankirtana pastimes. |
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