श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 198
 
 
श्लोक  3.5.198 
ত্রাহি ত্রাহি শ্রী-গৌরসুন্দর মহাপ্রভু!
এই কৃপা কর’ নাথ, না ছাডিবা কভু”
त्राहि त्राहि श्री-गौरसुन्दर महाप्रभु!
एइ कृपा कर’ नाथ, ना छाडिबा कभु”
 
 
अनुवाद
"हे भगवान गौरसुन्दर महाप्रभु, मेरी रक्षा कीजिए! मुझ पर ऐसी कृपा कीजिए कि आप मुझे कभी न छोड़ें।"
 
"O Lord Gaurasundara Mahaprabhu, please protect me! Bless me so that you never abandon me."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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