श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 189
 
 
श्लोक  3.5.189 
অশ্রু-কম্প-পুলকে রাজার অন্ত নাঞি
আনন্দে মূর্চ্ছিত হৈলেন সেই ঠাঙি
अश्रु-कम्प-पुलके राजार अन्त नाञि
आनन्दे मूर्च्छित हैलेन सेइ ठाङि
 
 
अनुवाद
राजा के शरीर पर लगातार रोने, काँपने और रोंगटे खड़े होने की भावनाएँ प्रकट होने लगीं। फिर वह वहीं बेहोश हो गया।
 
The king began to experience constant weeping, trembling, and goosebumps. Then, he fainted right there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)