श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 188
 
 
श्लोक  3.5.188 
একাকী প্রতাপরুদ্র গিযা সেই স্থানে
দীর্ঘ হৈ’ পডিলেন প্রভুর চরণে
एकाकी प्रतापरुद्र गिया सेइ स्थाने
दीर्घ है’ पडिलेन प्रभुर चरणे
 
 
अनुवाद
प्रतापरुद्र अकेले वहाँ गये और भगवान के चरण कमलों पर गिर पड़े।
 
Prataparudra went there alone and fell at the Lord's lotus feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)