श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 186
 
 
श्लोक  3.5.186 
বিশেষ উত্কণ্ঠা হৈল প্রভুরে দেখিতে
তথাপি না পারে কেহ দেখা করাইতে
विशेष उत्कण्ठा हैल प्रभुरे देखिते
तथापि ना पारे केह देखा कराइते
 
 
अनुवाद
उनमें प्रभु से मिलने की तीव्र इच्छा जागृत हुई, लेकिन कोई भी उनसे मिलने का प्रबंध नहीं कर सका।
 
A strong desire to meet the Lord arose in them, but no one could arrange to meet Him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)