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श्लोक 3.5.185  |
আপনে শ্রী-জগন্নাথ—চৈতন্য-গোসাঞি
রাজা জানিলেন, ইথে কিছু ভেদ নাই |
आपने श्री-जगन्नाथ—चैतन्य-गोसाञि
राजा जानिलेन, इथे किछु भेद नाइ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार राजा को यह अहसास हुआ कि भगवान जगन्नाथ और भगवान चैतन्य एक दूसरे से भिन्न नहीं हैं। |
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| Thus the king realized that Lord Jagannatha and Lord Chaitanya are not different from each other. |
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