श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 161
 
 
श्लोक  3.5.161 
ধূলায লালায নাসিকার প্রেম-ধারে
সকল শ্রী-অঙ্গ ব্যাপ্ত কীর্তন-বিকারে
धूलाय लालाय नासिकार प्रेम-धारे
सकल श्री-अङ्ग व्याप्त कीर्तन-विकारे
 
 
अनुवाद
कीर्तन के आनंद में भगवान का पूरा शरीर धूल, लार और नाक के पानी से ढक गया।
 
In the joy of kirtan, the entire body of the Lord was covered with dust, saliva and nasal water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)