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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 142
श्लोक
3.5.142
সার্বভৌম-আদি সবা-স্থানে রাজা কহে
তথাপি প্রভুরে কেহ না জানায ভযে
सार्वभौम-आदि सबा-स्थाने राजा कहे
तथापि प्रभुरे केह ना जानाय भये
अनुवाद
यद्यपि राजा ने सार्वभौम तथा अन्य लोगों से भगवान से उनकी भेंट कराने का अनुरोध किया, किन्तु भय के कारण उन्होंने ऐसा नहीं किया।
Although the king requested the sovereign and others to arrange a meeting with the Lord, they did not do so due to fear.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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