श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  3.5.133 
কখন নাচেন কাশী-মিশ্রের মন্দিরে
কখন নাচেন মহাপ্রভু সিন্ধু-তীরে
कखन नाचेन काशी-मिश्रेर मन्दिरे
कखन नाचेन महाप्रभु सिन्धु-तीरे
 
 
अनुवाद
कभी महाप्रभु काशी मिश्र के घर पर नृत्य करते थे, तो कभी सागर के तट पर नृत्य करते थे।
 
Sometimes Mahaprabhu used to dance at Kashi Mishra's house, and sometimes he used to dance on the seashore.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)