श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  3.5.129 
প্রভু ও সবারে মহা-প্রেমে করি’ কোলে
সিঞ্চিলা সবার অঙ্গ নযনের জলে
प्रभु ओ सबारे महा-प्रेमे करि’ कोले
सिञ्चिला सबार अङ्ग नयनेर जले
 
 
अनुवाद
भगवान ने बड़े स्नेह से सबको गले लगाया और अपनी आँखों से आँसुओं से उन्हें भिगो दिया।
 
God embraced everyone with great affection and drenched them with tears from his eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)