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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 125
श्लोक
3.5.125
সর্ব নীলাচল-দেশে উপজিল ধ্বনি
’পুনঃআইলেন প্রভু ন্যাসি-চূডামণি’
सर्व नीलाचल-देशे उपजिल ध्वनि
’पुनःआइलेन प्रभु न्यासि-चूडामणि’
अनुवाद
पूरे नीलांचल में यह समाचार फैल गया: “संन्यासियों का शिखर रत्न वापस आ गया है।”
The news spread throughout Nilachal: “The pinnacle jewel of the monks has returned.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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