श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  3.4.85 
লক্ষ-কোটি লোক মিলিঽ করে হরি-ধ্বনি
আনন্দে নাচযে মাঝে প্রভু ন্যাসি-মণি
लक्ष-कोटि लोक मिलिऽ करे हरि-ध्वनि
आनन्दे नाचये माझे प्रभु न्यासि-मणि
 
 
अनुवाद
लाखों लोग हरि का नाम जप रहे थे और संन्यासियों के शिखर रत्न आनन्दपूर्वक नाच रहे थे।
 
Lakhs of people were chanting the name of Hari and the top jewels of the sannyasis were dancing joyfully.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)