श्री मदन-मोहन मन्दिर के उत्तर में श्री सनातन-कुण्ड है। उस स्थान के आस-पास आठ अन्य कुण्ड हैं जिनमें राधा-कुण्ड, श्याम-कुण्ड, ललिता-कुण्ड और विशाखा-कुण्ड मुख्य हैं। यहाँ से कुछ दूरी पर श्री रूप-सागर नामक एक बड़ा सरोवर है, जिसे श्री रूप गोस्वामी ने बनवाया था। यह रूप-सागर श्री मदन-मोहन मन्दिर और हुसैन शाह के दरबार के बीच में स्थित है। रूप-सागर के स्नान घाट संगमरमर से ढँके हुए हैं। उन संगमरमर के फलकों में से किसी एक पर लिखा है : "श्री रामकेली का यह रूप-सागर घाट बंगाल के युग 1268 में बंगाल के मलदा जिले के व्यापारिक समुदायों के दान से बना था। इसका जल-भाग दस बीघा (लगभग तीन साढ़े तीन एकड़) है और इसके किनारों समेत यह बीस बीघा (लगभग छः साढ़े छः एकड़) में फैला है।"
श्री रामकेली से लगभग एक चौथाई मील दूर दक्षिण में एक बड़ा हाल है जिसे बारह दुआरी कहते हैं, क्योंकि इसमें बारह द्वार हैं। 1801 तक, क्रेन्ट साहिब के समय में, इस हाल के खंभे सोने से मढ़े हुए थे। इस हाल को लोग हुसैन शाह के दरबार के नाम से जानते हैं। कहते हैं, कि इस दरबार में दबीर खास का कार्यालय था। इस हाल की चारों दिशाओं में चार प्रवेश द्वार बने हुए हैं। ऐसा कहा जाता है, कि बादशाह होयासा-खाना घाट पर होया यानी ताजी हवा का आनन्द लेते थे। आगे कहा जाता है, कि जब श्री सनातन यवन रक्षक को सात हजार स्वर्ण मुद्राएँ देकर जेल से निकले थे, तो वह रात्रि में गंगा पार करके इस स्थान पर आये और "श्री गौरॉंग" "श्री गौरॉंग" चिल्लाने लगे। उस समय वहाँ एक घड़ियाल आया और श्री सनातन सात बार उसकी परिक्रमा की। श्री सनातन घड़ियाल की पीठ पर बैठकर गंगा पार हो गये। श्री गंगा देवी अब श्री मदन-मोहन मन्दिर से लगभग आधा मील दूर बहती हैं। इनके अतिरिक्त वहाँ हुसैन शाह बादशाह के बहुत से गौरव चिन्ह अभी भी विद्यमान हैं। दखल-दरवाजा (मुख्य प्रवेश द्वार), परिखा (खाई) और फिरोज़ खान (सबसे प्राचीन खंडहर जो एक ऊँची मीनार है जिससे प्राचीन गौड़ शहर को देखा जा सकता है), हैं। राजकोष, पुस्तकालय तथा लोतन मस्जिद (जो स्थापत्य कला के एक उत्तम उदाहरण है) के खंडहर भी हैं। मुसलमानों के राज्य करने से पहले यह स्थान लक्ष्मण सेन की राजधानी थी जो लक्ष्मणावती के नाम से प्रसिद्ध थी। यहाँ अब भी उसके खंडहर देखे जा सकते हैं।
माल्दह जिला स्थित सेना वंश की राजधानी गौड़ की राजधानी थी। गंगा वर्तमान में इस स्थान से कुछ दूरी पर बहती है। रमाकेली गांव गौड़ की राजधानी से थोड़ी दूरी पर स्थित है। श्री सनातन और श्री रूप गोस्वामी दोनों ही इस रामाकेली गांव में निवास करते थे।
