श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 495
 
 
श्लोक  3.4.495 
মহানন্দে উঠিল শ্রী-হরি-সঙ্কীর্তন
যে ধ্বনি পবিত্র করে অনন্ত-ভুবন
महानन्दे उठिल श्री-हरि-सङ्कीर्तन
ये ध्वनि पवित्र करे अनन्त-भुवन
 
 
अनुवाद
भगवान की महिमा के आनंदपूर्ण सामूहिक कीर्तन के ध्वनि कंपन ने संपूर्ण ब्रह्मांड को शुद्ध कर दिया।
 
The sound vibrations of the joyous congregational chanting of the Lord's glories purified the entire universe.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)