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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन
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श्लोक 483
श्लोक
3.4.483
“অতএব সর্বাদ্যে শ্রী-কৃষ্ণ পূজিঽ তবে
প্রীতে শিব পূজিঽ পূজিবেক সর্ব-দেবে”
“अतएव सर्वाद्ये श्री-कृष्ण पूजिऽ तबे
प्रीते शिव पूजिऽ पूजिबेक सर्व-देवे”
अनुवाद
अतः मनुष्य को सर्वप्रथम भगवान् कृष्ण की पूजा करनी चाहिए, तत्पश्चात् प्रेमपूर्वक भगवान् शिव की पूजा करने के पश्चात् समस्त देवताओं की पूजा करनी चाहिए।
Therefore, man should first worship Lord Krishna, then after lovingly worshiping Lord Shiva, he should worship all the gods.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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