श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 480
 
 
श्लोक  3.4.480 
শ্রী-বদনে কৃষ্ণচন্দ্র বোলেন আপনে
“শিব যে না পূজে, সে বা মোরে পূজে কেনে?
श्री-वदने कृष्णचन्द्र बोलेन आपने
“शिव ये ना पूजे, से वा मोरे पूजे केने?
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्णचन्द्र ने स्वयं अपने मुख से कहा है, "जो शिव की पूजा नहीं करता, वह मेरी पूजा क्यों करेगा?
 
Lord Krishnachandra himself said, "Why would someone who does not worship Shiva worship me?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)