श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 451
 
 
श्लोक  3.4.451 
কেহ বলে,—“মুঞি যত বৈষ্ণব-চরণ
মোর ভার সকল করিব প্রক্ষালন”
केह बले,—“मुञि यत वैष्णव-चरण
मोर भार सकल करिब प्रक्षालन”
 
 
अनुवाद
किसी ने कहा, “मेरी जिम्मेदारी सभी वैष्णवों के पैर धोने की होगी।”
 
Someone said, “My responsibility will be to wash the feet of all Vaishnavas.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)