श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 450
 
 
श्लोक  3.4.450 
কেহ বলে,—“জল আনিবারে মোর ভার”
কেহ বলে,—“মোর দায স্থান-উপস্কার”
केह बले,—“जल आनिबारे मोर भार”
केह बले,—“मोर दाय स्थान-उपस्कार”
 
 
अनुवाद
किसी और ने कहा, “मैं पानी लाऊँगा।” एक और व्यक्ति ने कहा, “मेरा काम इस जगह को साफ़ करना होगा।”
 
Someone else said, "I'll get water." Another person said, "My job will be to clean this place."
तात्पर्य
उपास्करा शब्‍द का अर्थ "साफ करना" या "झाडू लगाना" होता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)